Qaidi/क़ैदीhind_pocket_books978-01-4346-099-297801434609922023-02-01Hindi (India)116Softcover
Book profileHindi (India)
Book · 1 edition
Qaidi/क़ैदी
- 2023
- first published
- Hindi
- language
- 1
- edition
- 116
- pages
‘कौन कहता है कि मैं दुर्बल हो गया हूँ?’ ‘तुम खुद देख रहे होगे।’ ‘दिल की आग जब तक नहीं बुझेगी, आइवन नहीं मरेगा, मि. जेलर, सौ वर्ष तक नहीं, विश्वास रखिए।’ चौदह साल तक निरन्तर मानसिक वेदना और शारीरिक यातना भोगने के बाद आइवन ओखोटस्क जेल से निकला; पर उस पक्षी की भाँति नहीं, जो शिकारी के पिंजरे से पंखहीन होकर निकला हो बल्कि उस सिंह की भाँति, जिसे कठघरे की दीवारों ने और भी भयंकर तथा और भी रक्त-लोलुप बना दिया हो। उसके अन्तस्तल में एक द्रव ज्वाला उमड़ रही थी, जिसने अपने ताप से उसके बलिष्ठ शरीर, सुडौल अंग-प्रत्यंग और लहराती हुई अभिलाषाओं को झुलसा डाला था।
Editions
1 edition · sort: newest
Qaidi/क़ैदीhind_pocket_books978-01-4346-099-297801434609922023-02-01Hindi (India)116Softcover